दुनिया के सबसे बड़े ऑनलाइन संदर्भकोष विकीपीडिया की लोकप्रियता काफी बढ़ चुकी है। अब न केवल विद्यार्थी, बल्कि मीडियाकर्मी और शैक्षिक जगत के लोग भी विकीपीडिया का खासा इस्तेमाल कर रहे हैं। विकीपीडिया की लोकप्रियता की वजह से दुनिया के सबसे मशहूर एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटेनिका का प्रिंट संस्करण हाल में बंद कर दिया गया। 244 साल पहले शुरू हुआ ब्रिटेनिका सबसे प्रामाणिक संदर्भकोश के रूप में विख्यात है, लेकिन विकीपीडिया के सामने ब्रिटेनिका को भी घुटने टेकने पड़े हैं। अब ब्रिटेनिका वेब पर एनसाइक्लोपीडिया विकसित करेगी, लेकिन बात ब्रिटेनिका की नहीं विकीपीडिया की है, जिसकी विश्वसनीयता एक बार फिर सवालों के घेरे में है। पेन स्टेट विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर मारिका डब्लू डिसटासो के ताजा अध्ययन में कहा गया है कि विकीपीडिया पर मौजूद हर दस में से छह लेखों में अशुद्धियां हैं। यह सभी जानते हैं कि विकीपीडिया को स्वयंसेवक अपडेट करते हैं, लेकिन हाल के साल में विकीपीडिया ने अपनी साख बनाने के लिए कई ऐसे लोगों को नियुक्त किया है जो अशुद्धियों को दूर करने का काम करते हैं। विकीपीडिया का दावा भी है कि आप अशुद्धियों के बारे में बताकर उन्हें दूर करा सकते हैं, लेकिन शोध में कहा गया है कि ऐसा है नहीं। अध्ययन के दौरान किए एक सर्वे के मुताबिक जब विकीपीडिया के टॉक पेज के जरिए अशुद्धियां दुरुस्त करने की कोशिश हुई तो नतीजा बहुत उत्साहजनक नहीं रहा। 40 फीसदी लोगों को विकीपीडिया के संपादकों की तरफ से प्रतिक्रिया मिलने में एक दिन से ज्यादा का समय लगा जबकि 12 फीसदी को एक हफ्ते से ज्यादा का वक्त लगा। खास बात यह कि 25 फीसदी शिकायतों के संदर्भ में तो कोई प्रतिक्रिया ही नहीं मिली। इस अध्ययन के मुताबिक 60 फीसदी कंपनियों के पेजों पर उनके अथवा उनसे जुड़े ग्राहकों के बारे में तथ्यात्मक रूप से गलत जानकारी है। विकीपीडिया में अशुद्धियों की बात चिंताजनक इसलिए है, क्योंकि अब लोग इसे प्रामाणिक मानने लगे हैं। यह अध्ययन तो मूलत: अंग्रेजी पेजों को लेकर हुआ है। हिंदी व अन्य दूसरी भाषाओं में तो हाल और बुरा होगा। सूचना तकनीक से संबंध रखने वाले उत्कर्षराज ने कुछ दिनों पहले हिंदी विकीपीडिया के संबंध में एक दिलचस्प अध्ययन किया था। उनकी मानें तो विकीपीडिया पर संपादन करते वक्त उत्तराखंड के गांव श्रेणी में उन्हें 9450 लेख मिले, लेकिन इस श्रेणी के लगभग सभी पेजों में दर्ज जानकारी समान थी। गांव का नाम बदल दिया गया और फिर पूरी जानकारी उत्तराखंड राज्य की परोस दी गई। यहां तक कि भौगोलिक स्थिति और मानचित्र भी नहीं बदले गए। ऐसा हिंदी विकीपीडिया पर कई विषयों के मामले में दिखता है। कई पेजों पर शुरुआती दो पंक्तियां हिंदी में दर्ज कर बाकी जानकारी अंग्रेजी के पेज से उठाकर चस्पां कर दी गई है। विषयों को श्रेणीबद्ध करने में भयंकर गड़बडझाला है। एक मुख्य विषय के कई द्वितीयक पेज बना दिए गए हैं। इसका मतलब यह कि हिंदी विकीपीडिया को अपडेट करने वाले लोग प्रशिक्षित नहीं हैं। एक अन्य उदाहरण 13 जुलाई के मुंबई हमले के वक्त का है। उस दिन कई चैनलों पर खबर आई कि आतंकवादियों ने कसाब के जन्मदिन पर हमला किया। दरअसल चैनलों ने कसाब के जन्मदिन की जानकारी विकीपीडिया से ली। विकीपीडिया पर किसी शख्स ने कसाब की दर्ज जन्मतिथि में बदलाव कर दिया था। ऐसे कई दूसरे उदाहरण भी हैं और ये इस तरफ इशारा करते हैं कि ऑनलाइन इनसाइक्लोपीडिया विकीपीडिया एक औपचारिक संदर्भकोष का स्थान फिलहाल नहीं ले सकता, क्योंकि इसके कार्य करने के तरीके में गड़बडि़यां लाजिमी हैं। कई बार कुछ शरारती लोग जानबूझकर विकीपीडिया में गलत सूचनाएं डाल देते हैं तो कई बार अधकचरी जानकारी रखने वाले लोग अनजाने में ग़लती कर बैठते हैं, लेकिन ये बात हम सभी को समझना जरूरी है।

VISHESH-ye ek copy paste kiya gaya lekh hai. uprokt nakaratmak baton k bad b wiki ka mahatv aur upyogita sanka rahit hai (angregi madhyam k liye ya aanshik roop se any madhyamon k liye) lekin sath me trutiyon se savdhan rahne ki b jaroorat hai.

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